एनयूजे ने की छोटे अखबारों के लिए जीएसटी नम्बर हटाने की मांग

 देहरादून। उत्तराखण्ड के मीडियाकर्मियों की प्रमुख राज्यस्तरीय पंजीकृत संस्था नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखण्ड) ने केंद्रीय संचार ब्यूरो के ऑन लाइन विज्ञापन दर नवीनीकरण फार्मेट में अखबार की कीमत ‘प्रति कॉपी’ और ‘वार्षिक मूल्य’ की अलग-अलग व्यवस्था तथा छोटे अखबारों के लिए जीएसटी नम्बर हटाने की मांग की है।यूनियन की ओर केन्द्रीय संचार ब्यूरो के महानिदेशक को भेजे पत्र में कहा गया है कि डीएवीपी,केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए समाचार पत्रों की ऑन लाइन प्रारंभ की गयी विज्ञापन दर नवीनीकरण प्रणाली के प्रिंट इंफारमेंशन टैब अंतर्गत न्यूनतम वर्तमान कार्ड दर के बाद अखबार की कीमत का कालम दिया गया है। किन्तु इसमें अखबार की कीमत की प्रति कापी और वार्षिक सबक्रिप्सन का अलग-अलग विकल्प नहीं दिया गया है। यूनियन द्वारा कहा गया है कि साप्ताहिक,पाक्षिक,मासिक,त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक पत्र-पत्रिकाओं के लिए आरएनआई में वार्षिक सबक्रिप्सन का भी प्राविधान है जो डीएवीपी,केंद्रीय संचार ब्यूरो की विज्ञापन दर नवीकरण प्रक्रिया में भी शामिल किया जाना चाहिये। ऐसा न करने से प्रति कापी और वार्षिक मूल्य की सही गणना नहीं हो सकती और समाचार पत्र-पत्रिकाओं के हित प्रभावित हो सकते हैं। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोक चन्द्र भट्ट की ओर से भेजे गये पत्र भी यह भी कहा गया है कि कुछ समाचार पत्रों को वार्षिक टर्नओवर के आप्सन भरने में समस्याएं आ रही हैं। समाचार पत्र के वार्षिक टर्नओवर के साथ जीएसटी न0 मांगा जा रहा है। अगर किसी का टर्नओवर घट गया है या उसे हानि हुई है तो वह अपना टर्नओवर कम कर सकता है। जीएसटी दायरे में न आने के बावजूद ऐसे में जीएसटी नम्बर मांगे जाने से आवदेक भ्रमित हो रहे है। उन्होंने कहा है कि इसमें टर्न ओवर कम किये जाने पर जीएसटी नम्बर आने का आप्सन स्वयं ही हट जाना चाहिये। यूनियन की ओर से केंद्रीय संचार ब्यूरो के महानिदेशक से अनुरोध किया गया है कि छोटे स्तर के साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक पत्र-पत्रिकाओं के समाचार पत्र प्रकाशकों के हित में उक्त का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की जाये।