नवरात्रि, दिव्यता की चेतना की रात्रिस्वामी चिदानन्द सरस्वती

  नवरात्रि,माँ दुर्गा को समर्पित नौ रातों का पर्व


ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आज के सत्संग में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का दिव्यता से वर्णन किया। स्वामी जी ने कहा कि नवरात्रि, माँ दुर्गा को समर्पित नौ रातों का पर्व है। यह आध्यात्मिक जागरूकता,भक्ति और आंतरिक परिवर्तन का दिव्य अवसर है।इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है,जो विभिन्न गुणों और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और हमारे शरीर,मन और आत्मा को प्रभावित करते हैं।माँ का प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री,पर्वतराज की पुत्री हैं जो शक्ति,स्थिरता और पवित्रता का प्रतीक हैं।वह प्रकृति की अडिग शक्ति को दर्शाती हैं और हमें अपने जीवन में स्थिरता बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं। माँ ब्रह्मचारिणी,तपस्विनी स्वरूप है।माँ ब्रह्मचारिणी तप,भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की प्रतीक हैं।वह हमें अनुशासन और आत्म-संयम की शिक्षा देती हैं।जो हमारी सहनशीलता और आंतरिक शक्ति को बढ़ाती हैं धैर्य और आत्म-नियंत्रण विकसित करती हैं तथा उच्च चेतना और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर प्रेरित करती हैं।माँ चंद्रघंटा,शांति और वीरता का प्रतीक है। माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है,जो शांति और साहस दोनों का प्रतीक है।वह हमें संतुलन और धैर्य के साथ शक्ति का उपयोग करने की शिक्षा देती हैं। माता तंत्रिका तंत्र को ऊर्जा प्रदान करती हैं और आत्मविश्वास बढ़ाती हैं,भयमुक्ति और मानसिक स्थिरता प्रदान करती हैं तथा आंतरिक योद्धा को जागृत करती हैं। माँ कूष्मांडा,ब्रह्मांड की सृजनकर्ता है।माँ कूष्मांडा अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी है। वह समस्त ब्रह्मांडीय ऊर्जा की स्रोत हैं जो हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती हैं,रचनात्मकता और आशावादी बनाती है तथा ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ती हैं और सकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं। माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और मातृ प्रेम,सुरक्षा और ज्ञान का प्रतीक हैं जो पोषण और सुरक्षा की भावना को बढ़ाती हैं। माँ कात्यायनी,माँ दुर्गा का उग्र स्वरूप है।माँ कात्यायनी योद्धा देवी हैं जो दुष्ट शक्तियों का नाश करती हैं। वह शक्ति,दृढ़ता और न्याय की प्रतीक हैं। माँ कालरात्रि अपने उग्र रूप में अंधकार,भय और अज्ञानता का नाश करती हैं,जिससे आध्यात्मिक मोक्ष की प्राप्ति होती है जो शरीर को शुद्ध करती हैं और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती हैं,भय और असुरक्षा को समाप्त करती हैं। माँ गौरी,पवित्रता और शांति का प्रतीक है।माँ गौरी पवित्रता,सौंदर्य और सौम्यता की देवी हैं।वह अपने भक्तों को शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं जो आंतरिक और बाहरी स्वास्थ्य को बढ़ाती हैं।माँ सिद्धिदात्री,सिद्धियों और ज्ञान की प्रदाता है। माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ज्ञान,आध्यात्मिक जागरूकता और दिव्य सिद्धियाँ प्रदान करती हैं जो अंतर्ज्ञान और मानसिक क्षमता को बढ़ाती हैं,बुद्धि और निर्णय क्षमता को तीव्र करती हैं।माँ दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप में एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा है,जो हमारे शरीर,मन और आत्मा को प्रभावित करती है।नवरात्रि के दौरान इन दिव्यस्वरूपों की आराधना करके हम आत्म-जागरूकता ,आध्यात्मिक परिवर्तन और दिव्य संबंध की यात्रा पर आगे बढ़ सकते हैं।