आचार्य किशोरी दास वाजपेयी हिन्दी के मूर्धन्य विद्वान थे


हरिद्वार। आचार्य किशोरी दास वाजपेयी हिन्दी के मूर्धन्य विद्वान थे।उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में आचार्य किशोरी दास वाजपेयी द्वारा हिन्दी व संस्कृत भाषा के क्षेत्र में किए गए अविस्मरणीय योगदान व कार्य पर व्यापक स्तर पर शोध अनुसंधान कराए जाने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करते हुए आचार्य किशोरी दास वाजपेयी शोध पीठ की स्थापना की गयी है।यह उद्गार उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.दिनेशचन्द्र शास्त्री ने हिन्दी प्रोत्साहन समिति,उत्तराखण्ड इकाई द्वारा उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में सम्मानित किए जाने पर व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि आचार्य किशोरी दास वाजपेयी का योगदान हिन्दी साहित्य के साथ-साथ देश का आजादी में भी महत्वपूर्ण रहा है। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध पीठ स्थापित होने से जहां हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में शोध छात्रों को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे वहीं आने वाली युवा पीढ़ी को हिन्दी जगत के इस महान मूर्धन्य विद्वान के द्वारा किए गए योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी उपलब्ध होगी।इस अवसर पर हिन्दी प्रोत्साहन समिति,उत्तराखण्ड इकाई के प्रदेश अध्यक्ष डा.पंकज कौशिक ने कहा कि हिन्दी हमारे जीवन व शिक्षा का मूल आधार है। हिन्दी भाषा भारतीय संस्कृति में पूर्ण रूप से रची बसी है। एक तरफ जहां सरकारी स्तर पर हिन्दी को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं वहीं आम जनता तक अपनी बात को पहुंचाने के लिए सरकारी कार्यालयों में अधिक-से-अधिक हिन्दी भाषा में कार्य किए जाने की और अधिक आवश्यकता है।इस अवसर पर हिन्दी प्रोत्साहन समिति,उत्तराखण्ड इकाई के प्रदेश महामंत्री कुलभूषण शर्मा व प्रदेश कोषाध्यक्ष हेमन्त सिंह नेगी ने कहा कि हम सभी को मिलकर हिन्दी भाषा को अधिक-से-अधिक अपने दैनिक जीवन में उपयोग में लाने के प्रयास करने होंगे। हिंदी हमारा गौरव व मातृ भाषा है जिसके माध्यम से हम सरल व सहज शब्दों में अपनी बात देश के आम आदमी तक पहुंचाने में सहायक होते हैं।