भूमि को उर्वर व संरक्षित रखना सबसे अहम: डॉ चिन्मय पण्ड्या

देसंविवि में आयोजित भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान


हरिद्वार।अखिल विश्व गायत्री परिवार सदैव प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहा है।इसके अंतर्गत देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसके अंतर्गत विशेषज्ञों ने युवा पीढ़ी को भूमि को उर्वर बनाए रखने एवं पर्यावरण को संरक्षित बनाने के विविध उपायों पर जोर दिया।इस अवसर पर अपने संदेश में देसंविवि के प्रतिकुलपति युवा आइकान डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत में लगभग 30प्रतिशत भूमि क्षरण से पीड़ित है,जो हमारी भूमि के प्रति उदासीनता की ओर इंगित करती है। युवा आइकान ने कहा कि विश्व आज अपने पर्यावरण असंतुलन के गंभीरतम दौर से गुजर रहा है।अपने देश में भी तीव्रगति से हो रहे वायु,जल,भूमि प्रदुषण बहुत गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण समस्याएँ हैं,जो मानव जीवन के लिए अत्यंत घातक हैं। प्रतिकुलपति ने कहा कि भारतीय दर्शन एकात्म विश्वदृष्टि में विश्वास करता है।संपूर्ण सृष्टि में प्रकृति एवं पर्यावरण के बीच एक अन्योन्याश्रित एवं अविभाज्य संबन्ध है। युवा आइकान डॉ.पण्ड्या ने कहा कि इस अभियान के तहत देश भर में भूमि को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्राकृतिक और वैज्ञानिक उपायों का विस्तार किया जाना है। युवा आइकान ने जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन,जल-संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन की नई तकनीकें,यज्ञ विज्ञान द्वारा भूमि की उर्वरता में सुधार,भूमि क्षरण को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास आदि पर भी अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। अभियान के समन्वयक डॉ.राजीव गुप्ता ने बताया कि इस दिशा में कार्य करने के लिए देसंविवि के युवा संकल्पित हुए।उन्होंने बताया कि अभी नहीं,तो कभी नहीं की तर्ज पर भूमि को उर्वर बनाने तथा संरक्षित किया जाना चाहिए, अन्यथा आने वाले समय में खाद्यानों की भारी कमी हो सकती है। इस अवसर पर अनेक विद्यार्थियों ने भूमि सुपोषण एवं पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार भी रखे।