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दक्षिणकाली मन्दिर में श्रावण में शिव को समर्पित विशेष अनु ष्ठान प्रारम्भ
July 7, 2020 • BABLI JHA • other

हरिद्वार। श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि देवों के देव महादेव को अति प्रिय श्रावण माह का शुभारम्भ सोमवार से हुआ है और समापन भी सोमवार को ही होगा। ऐसे में यह श्रावण विशेष फलदायी हो गया है। प्रत्येक भक्त को इस विशेष आध्यात्मिक अवसर का लाभ अवश्य उठाना चाहिए। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने उक्त उद्गार पूरे श्रावण मास मंदिर प्रांगण में चलने वाले भगवान शिव को समर्पित विशेष अनुष्ठान के दौरान व्यक्त किए। अनुष्ठान में जिले के पुलिस कप्तान सेंथिल अबदुई कृष्णराज एस. भी पत्नि संग सम्मिलित हुए और भोलेनाथ की पूजा अर्चना व रूद्राभिषेक कर लोक कल्याण की कामना की। इस दौरान स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव देवी पार्वती के साथ भू-लोक में निवास करते हैं। श्रावण मास में भगवान शिव की जलहरि में स्वयं भगवती पार्वती निवास करती हैं। इसलिए भगवान शिव के साथ मां भगवती की भी पूजा करनी चाहिए। श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से वे बेहद प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन सावन मास में ही हुआ था। जब मंथन से विष निकला तो पूरे संसार की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। विष से उनका कंठ नीला पड़ गया। जिससे वे नीलकंठ कहलाए। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि अपने कंठ में विष धारण कर संसार की रक्षा करने वाले भगवान शिव कोरोना महामारी से भी पूरे संसार की रक्षा करेंगे। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस. ने कहा कि सावन के महीने का हिन्दू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है। सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित रहता है। इसलिए सभी को भगवान शिव की पूजा आराधना अवश्य करनी चाहिए। कावंड़ियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष कांवड़ मेला स्थगित कर दिया गया है। इसलिए सभी शिव भक्त सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए घर पर रहकर ही पूजा अर्चना करें और महामारी को नियंत्रित करने में सहयोग करें। इस दौरान आचार्य पवनदत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पाण्डे, स्वामी विवेकानंद ब्र्हम्मचारी, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, अंकुश शुक्ला, सागर ओझा, अनूप भारद्वाज, पंडित शिवकुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।