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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की सुख समृद्वि की कामना के साथ की पूजा अर्चना
July 19, 2020 • BABLI JHA • other

हरिद्वार। श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि सदाशिव भगवान भोलेनाथ की आराधना कभी निष्फल नहीं जाती। श्रावण में नियमपूर्वक सच्चे अंतःकरण से भगवान शिव का जलाभिषेक करने वाले साधक को महादेव के साथ मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वे श्री दक्षिण काली मंदिर प्रांगण में स्थित शिव मंदिर में पूरे सावन चलने वाले विशेष अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। श्रावण की महाशिवरात्रि के अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत भी अनुष्ठान में शामिल होकर भगवान शिव की पूजा अर्चना व जलाभिषेक कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि देवों के महादेव भगवान शिव एक मात्र ऐसे देव हैं जो भक्तों की सूक्ष्म आराधना व जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए उन्हें भोले भण्डारी भी कहा गया है जो प्रसन्न होने पर भक्तों के भण्डार भर देते हैं। भगवान शिव को प्रकृति से विशेष लगाव है। वर्षा ऋतु में प्राकृतिक वातावरण अत्यन्त मनोरम हो जाता है। ऐसे मनोरम वातावरण में हरिद्वार में साक्षात रूप से विराजमान रहकर सृष्टि का संचालन करने वाले भगवान शिव की आराधना व जलाभिषेक करोड़ों गुणा पुण्य फल प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस से पीड़ित है। भारत भी इस महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को पीकर संसार की रक्षा करने वाले भगवान शिव ही कोरोना संकट से मानवता की रक्षा करेंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि उत्तराखण्ड देवों की भूमि है। सावन में भगवान शिव स्वयं हरिद्वार में विराजमान रहते हैं। ऐसे में सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मंदिर में स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी के सानिध्य में भगवान शिव की आराधना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की गयी। शिव कृपा से कोरोना से निजात मिलेगी, राज्य विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर होगा तथा सामान्य जन का जीवन उन्नत होगा। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश जमदग्नि ने कहा कि भगवान शिव को समर्पित सावन में सभी को सरकारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस अवसर पर आचार्य पवनदत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पाण्डे, स्वामी विवेकानंद ब्र्हम्मचारी, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, अंकुश शुक्ला, सागर ओझा, पंडित शिवकुमार शर्मा, कृष्णा शर्मा आदि मौजूद रहे।