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गुकाविवि में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वेबीनार का आयोजन
August 22, 2020 • BABLI JHA • other

हरिद्वार। मानव अधिकार संरक्षण समिति द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वेबीनार का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि वैदिक जीवन के चार आश्रम एक व्यक्ति के कर्म और धर्म पर आधारित थे। एक भारतीय का औसत जीवन 100 वर्ष माना जाता था। इसके आधार पर वैदिक जीवन के चार आश्रम थे- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। प्रत्येक चरण या आश्रम का लक्ष्य उन आदर्शों को पूरा करना था जिन पर ये चरण विभाजित थे। आश्रम जीवन के चरणों का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी आयु के आधार पर जीवन के सभी चार चरणों में आश्रय लेता है। ब्रह्मचर्य आश्रम में विद्यार्थी अपना जीवन शिक्षा ग्रहण करने में व्यतीत करता हैं। ये सब चीजे ब्रह्मचर्य में आती हैं। फिर उसके बाद गृहस्थाश्रम हैं, मनुष्य का काम घर चलाने के लिए पैसे कमाना और घर के सारे व्यक्तियों का ध्यान रखना होता था। गृहस्थाश्रम में अर्थ, मोक्ष, धर्म और काम ये चार प्रमुख ध्येय होते थे। जब घर की जिम्मेदारियां खत्म हो जाती है, तब मनुष्य का काम धीरे धीरे अपना मन सामाजिक कार्य करने में लगता हैं और इसे वानप्रस्थाश्रम कहते हैं और ये मनुष्य के ५० से ७५ वर्ष के आयु तक रहता था। संन्यासाश्रम में मनुष्य अपना ध्यान घर से पूरी तरह हटाकर सामाजिक कार्य में लगा देता था। जब मनुष्य की आयु ७५ वर्ष से ज्यादा हो जाती है तब इस आश्रम के अनुसार उसे जीवन व्यतीत करना होता हैं। इस आश्रम का उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति का होता था। इस तरह मनुष्य का जीवन चार भागों में बाँटा गया था। उन्होने वरिष्ठ नागरिकों को समाज का अभिन्न अंग बताते हुए युवा पीढ़ी को उनका सम्मान करने को प्रेरित किया। अंत में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० रूप किशोर शास्त्री ने मानव अधिकार संरक्षण समिति द्वारा किए गए कार्य की सराहना की।            मानव अधिकार संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर मधुसूदन आर्य ने कहा की हमारा भारत तो बुजुर्गों को भगवान के रूप में मानता है इतिहास में अनेकों ऐसे उदाहरण हैं कि माता पिता की आज्ञा से भगवान श्री राम जैसे अवतारी पुरुषों ने राजपाट त्याग कर जंगलों में जीवन बिताया मातृ पितृ भक्त सरवन कुमार ने अपने अंधे माता पिता को कानों में बिठाकर चार धाम की यात्रा की। उन्होने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2007 में सीनियर सिटिजन मेंटेनेंस वेलफेयर एक्ट का गठन किया था, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्होने कहा कि विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस का आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा श्रीगणेश किया गया था। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य संसार के बुजुर्ग लोगों को सम्मान देने के अलावा उनकी वर्तमान समस्याओं के बारे में जनमानस में जागरूकता बढ़ाना है। विशिष्ट अतिथि स्टेट हेड हेल्पज इंडिया देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक चेतन उपाध्याय ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए उत्तराखंड के हाईकोर्ट ने राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। वरिष्ठ नागरिकों को अपनी शिकायतों के लिए अब न्यायालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य के बुजुर्गों की शिकायत हर जिले में तैनात मेंटेनेंस अधिकारी सुनेंगे और एक माह में उनकी शिकायतों का निस्तारण भी करेंगे। अगर शिकायत का निस्तारण नहीं हुआ तो डीएम स्तर के अपीलीय अधिकारी के पास वरिष्ठ नागरिक अपनी फरियाद रख सकेंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के लिए तीन महीने में प्रचार प्रसार की व्यवस्था करें। मानव अधिकार संरक्षण समिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री, नानक चंद गोयल ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक यानी बुजुर्ग समाज का अभिन्न अंग है। वरिष्ठ नागरिक अपने जीवन में प्रत्येक प्रकार के अनुभव को प्राप्त करने के बाद ही इस स्टेज पर पहुंचते हैं। इसलिए समाज को वरिष्ठ नागरिक ही सही और उचित मार्ग दर्शन दे सकते हैं। लेकिन इन दिनों वरिष्ठ नागरिकों को समाज का एक तबका भूलता जा रहा है। कहा कि वृद्धाश्रम भारतवर्ष में नहीं होना चाहिए। जिस देश में श्रवण कुमार जैसे सुपुत्र रहे हो, उस देश में वृद्धाश्रम को कोई स्थान नहीं है।