ALL crime social current political sports other
मन लाल डिग्री कॉलेज लंढौरा में वेबीनार राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
August 7, 2020 • BABLI JHA • other

हरिद्वार/लण्ढौरा। चमन लाल महाविद्यालय लंढौरा की राजनीति विज्ञान विभाग व समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित हुआ। जिसका विषय भारतीय परिवार व्यवस्था व वृद्धों की सामाजिक चुनौतियां रही। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए विभिन्न आर के आयोजक सचिव व राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ धर्मेंद्र कुमार ने इस विषय को चुनने के लिए प्रबंध समिति अध्यक्ष राम कुमार शर्मा का हार्दिक आभार ज्ञापित किया। बताया कि वर्तमान परिपेक्ष में यह विषय कितना प्रासंगिक है जब हम भाग दौड़ भरी जिंदगी में भौतिक सुखों की प्राप्ति करने के लिए भाग तो रहे है।ं लेकिन कहीं ना कहीं अपने उन बुजुर्गों अपने उन बड़ों का निरादर भी कर रहे है।ं                                                    महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुशील उपाध्याय ने स्वागत व्याख्यान देते हुए वेबीनार में आए आमंत्रित समस्त अतिथि गण मुख्य अतिथि गण एवं वक्ताओं का आभार व्यक्त किया वह बताया कि आज के परिपेक्ष में अगर देखा जाए तो जो विषय वेबीनार के लिए चुना है वह बहुत ही संवेदनशील व चुनौतीपूर्ण विषय है क्योंकि सामाजिक परिदृश्य में कहीं ना कहीं हम पिछड़ रहे हैं हमने परिवारों का विघटन किया है गांव में पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे उन संयुक्त परिवारों में बड़े बुजुर्गों का आदर हुआ करता था और यदि कोई समस्या किसी परिवार में उत्पन्न हो गई तो उस समस्या का हल वह बड़े बुजुर्गों निकालते थे उन्हें सभी लोग आदर भाव से देखते थे। मगर वर्तमान में यह बिल्कुल ही मगर वर्तमान में स्थिति बिल्कुल ही उलट है आज हम जिंदगी की रफ्तार में परिवार को भूल गए हैं और बुजुर्गों का आदर भाव करना भी भूल गए हैं अगर वृद्धा आश्रम ना होते तो बुजुर्गों की स्थिति और भी दयनीय होती है।                        कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए पूर्व कुलपति व उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य डॉ सुधा रानी पांडे ने बताया कि भारत गांव का देश है वेबीनार के आयोजकों ने जो विषय चुना है इस विषय को चुनने के लिए सबसे पहले उन्हें आयोजकों को अपनी बधाई ज्ञापित कि वह इस विषय की संवेदनशीलता व चुनौतियों के बारे में बताया कि किस प्रकार से आज परिवार टूट रहे हैं और परिवार टूटने के बाद किस प्रकार से वृद्ध व्यक्तियों का निरादर परिवारों में बढ़ रहा है अगर वृद्धा आश्रम ना होते तो शायद वृद्धों की स्थिति और भी नाजुक होती कहीं ना कहीं उन्हें अपनी उम्र के लोगों से मिलाने का कार्य वृद्धा आश्रम कर रहे हैं जिसके जिससे उनका जीवन आसान हो रहा है। कार्यक्रम में विशिष्ट  अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ विनय विद्यालंकर बताया कि भारत में बुजुर्गों के समक्ष आने वाली चुनौतियां वेदों में भी विद्वान रही हैं उसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन के जीवन में घटी घटनाओं का व्याख्यान किया। जिसमें उन्होंने बताया कि किस प्रकार से गांव में जो परिवार रहते हैं वह संयुक्त रूप से अपने जीवन को यापन करते हैं और कोई भी समस्या उन परिवारों के सामने यदि होती है तो पूरा परिवार उस चुनौती का डटकर के सामना करता है और वहां बड़े लोगों का आदर भाव इतना होता है कि कोई भी व्यक्ति अगर बड़ों ने कोई फैसला ले लिया तो उसका फैसला अटल होता था मगर वर्तमान में हम इस चीज में पिछड़ रहे हैं इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार के बड़े बुजुर्गों का आदर करना चाहिए उनका मान करना चाहिए कभी भी उनका निराधार नहीं करना चाहिए। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ प्रशांत कुमार ने कहा कि आज के परिपेक्ष में यदि देखा जाए तो हम परिवारों का विघटन करके शहरीकरण व नगरीकरण की ओर बढ़ रहे हैं जो परिवारों के टूटने का एक मुख्य कारण है और क्योंकि हम भौतिक सुखों की प्राप्ति करने के लिए ही शहरों की ओर आ रहे हैं तो ऐसी स्थिति में परिवारों का टूटना लाजमी है जिसका सबसे बड़ा नुकसान घर के बुजुर्गों को तो हो रहा ।         विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ राकेश राणा ने बताया कि आज के बाजारवाद में क्योंकि हर व्यक्ति पूंजी पति बनना चाहता है और पूंजी को एकत्रित करने के लिए किस प्रकार से अपने पारिवारिक मूल्यों को खो रहा है और उन मूल्यों का हनन हो रहा है जिससे हम अपने बड़े बुजुर्गों का निरादर हर समय कर रहे हैं तो ऐसे में हमें बाजारवाद से बचना होगा और यदि हमें बाजारवाद को भी अपनाना है तो हमें अपने बड़े बुजुर्गों को साथ लेकर के चलना होगा ताकि परिवारों का विघटन होने से बचे और बड़े बुजुर्गों का निरादर ना हो और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियां ना रहे। अंतिम वक्ता के रूप में डॉक्टर अखिलेश शुक्ला ने बताया कि आज के परिपेक्ष में अगर देखा जाए तो संयुक्त और एकांकी परिवार दो परिवारों की व्यवस्था ही देखने को मिलती है लेकिन अगर हम 8ः30 40 वर्षों पहले भारत की बात करें तो भारत के गांव में आपको कहीं पर भी एकांकी परिवार नजर नहीं आते थे आज गांव में भी व्यवस्था बिल्कुल बदल चुकी हैं वहां पर भी संयुक्त परिवारों की जगह एकांकी परिवारों ने ले ली है जिससे बुजुर्गों का अनादर बढ़ाएं ।   अंत में सभी वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए समाजशास्त्र विभाग के डॉक्टर नवीन कुमार ने कहा कि सभी वक्ताओं ने अपने एक से एक विचार प्रस्तुत किए हैं उन्होंने सेमिनार में प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन स्वागत किया व धन्यवाद ज्ञापित किया ।कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार व डॉ दीपक अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया