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पतंजलि ने योग और आयुर्वेद का समावेश लोगों की जीवनशैली में कराया-योगगुरू रामदेव
August 15, 2020 • BABLI JHA • current

हरिद्वार। 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर योगऋषि स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि के विभिन्न परिसरों में ध्वजारोहण कर देशवासियों को शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि हमें अपने कर्म को धर्म मानकर स्वधर्म, राष्ट्रधर्म व मानवधर्म को निभाते हुए राष्ट्र के लिए संकल्पित होने का दिन है। उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ ने राष्ट्रधर्म व राष्ट्रहित को सर्वोपरि लक्ष्य बनाकर जो कार्य किए हैं। वे पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है। पतंजलि योगपीठ ने पूरे विश्व का सबसे बड़ा योग का संस्थान भारत माता व मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया है तथा साथ ही महर्षि चरक, सुश्रुत, ध्नवन्तरि से चली आई आयुर्वेद की महान् परम्परा को आचार्यश्री ने अपने बल, तप, पुरुषार्थ से सींचा है। पूरी दुनिया में आयुर्वेद पर क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल तथा ड्रग डिस्कवरी का काम सर्वप्रथम पतंजलि ने किया। आयुर्वेद जिसे अभी तक मात्रा फूड सप्लिमेंट का दर्जा था उसे पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मापदण्डों के अनुसार मेडिसीन का दर्जा दिलाने का काम किया है। आज ब्लड पे्रशर के लिए मुक्तावटी, मधुमेह के लिए मधुनाशिनी, हृदय रोगों के लिए हृदयामृत वटी, डेंगू के लिए डेंगूनिल वटी और चाहे लाख विवाद और लाख षड्यंत्रों खड़े किए गए हों, परन्तु लाखों-करोड़ों लोगों को जीवन देने का काम कोरोनिल ने किया है। कहा कि दुनिया में कोरोना रोगियों का सबसे ज्यादा रिकवरी रेट और सबसे कम डैथ रेट भारत में ही है, और इसमें सबसे बड़ा योगदान पतंजलि योगपीठ का है। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने योग और आयुर्वेद का समावेश लोगों की जीवनशैली में कराया। उन्होंने कहा कि 1857 में प्रथम स्वतंत्राता संग्राम के समय स्वदेशी से राष्ट्र को स्वाधीन बनाने का संकल्प लिया गया था। इसके लिए लाखों लोग कुर्बान हो गए। उस स्वदेशी के नारे, विचार व विचारधरा को जमीन पर उतारकर, विदेशी कम्पनियों को परास्त कर, स्वदेशी को ऊँचा करने का काम पतंजलि ने ही किया है। आज पूरे देश में स्वदेशी के नारे गूँज रहे हैं, लोकल को ग्लोबल बनाना है व लोकल के लिए वोकल होना है। उन्होंने आह्वान किया कि आज हम इस बात के लिए संकल्पित हों कि हम स्वदेशी को अपनाएँगे और विदेशी कंपनियों की आर्थिक व वैचारिक सांस्कृतिक लूट से भारत माता को बचाएँगे। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हम सबके लिए आज का पावन दिन बहुत ही श्रद्वा के साथ वीर शहीदों को स्मरण करने का है। उन्होंने कहा कि राजनैतिक आजादी ही आजादी नहीं है, हमें पूर्ण आजाद होने के लिए स्वयं को भी तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि आज एक छोटी सी महामारी के सामने अमेरिका जैसे विकसित देश ने भी घुटने टेक दिए परन्तु ऋषियों की विरासत योग व आयुर्वेद से हम घुटने टेकने से बच गए। योग व आयुर्वेद की प्रामाणिकता का यह प्रत्यक्ष उदाहरण है। योग व आयुर्वेद की विध को आत्मसात करने के लिए संकल्पि भी हमको ही होना होगा। इस देश के निर्माण के लिए हमको ही आगे आना होगा, बाहर से आकर कोई राष्ट्रनिर्माण नहीं करेगा। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के विभिन्न परिसरों में स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के कर-कमलों से ध्वजारोहण किया गया। कार्यक्रम में पतंजलि से सम्बद्व समस्त इकाइयों के प्रमुख, विभाग प्रमुख, अधिकारीगण व कर्मचारी उपस्थित रहे।