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पतंजलि विवि में‘योग सूत्र एवं इसकी तकनीकी शब्दावली’ पर पांच दिवसीय बेवगोष्ठी शुरू
August 27, 2020 • BABLI JHA • other

हरिद्वार। वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा समायोजित ‘योग सूत्र एवं इसकी तकनीकी शब्दावली’ विषय पर पांच दिवसीय वेबगोष्ठी का भव्य शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चारण से हुआ। वि.वि. के संकायाध्यक्ष,कार्यक्रम के संयोजक डाॅ. वी. के. कटियार द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों, शोधकत्र्ताओं एवं प्रतिभागियों के स्वागत-अभिनन्दन के पश्चात् कार्यक्रम के सह-संयोजक डाॅ. रुद्र भण्डारी द्वारा कार्यक्रम की संक्षिप्त रूप-रेखा प्रस्तुत की गयी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष, सी.एस.टी.टी, नई दिल्ली प्रो0 अवनीश कुमार ने अपने उद्बोधन में कोरोना की रोकथाम के लिए पतंजलि परिवार के भगीरथ प्रयास की सराहना करते हुए शब्दावली आयोग के कार्यक्षेत्र एवं भावी योजना के बारे में संक्षिप्त चर्चा की। इसके साथ ही प्रो0 अवनीश ने संस्कृत को सबसे प्राचीनतम एवं अपार ज्ञान सम्पदा से परिपूर्ण भाषा बताते हुए इसे प्राचीनकाल में प्रबुद्व वर्गों के चर्चा की भाषा बताया। कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रमेश कुमार पाण्डेय ने कार्यशाला को अति आवश्यक बताते हुए कहा कि ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है और योग ज्ञान प्राप्त करने का दिव्य साधन है। पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति डाॅ. महावीर अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगर्षि स्वामी रामदेव एवं कुलपति आचार्य बालकृष्ण को नमन करते हुए कहा कि आत्माबोध से बढ़कर कुछ भी नहीं है। जीवन का कायाकल्प अध्यात्म विद्या के बिना सम्भव नहीं हो सकता है। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण द्वारा वीडियो संदेश के माध्यम से अध्यक्षीय उद्बोधन दिया गया। उन्होंने दुनिया को दुनिया की ही भाषा में समझाने पर बल देते हुए कहा कि शास्त्रीय एवं तकनीकी शब्दों के अर्थ जाने बिना उसके दिव्य भाव को ग्रहण नहीं किया जा सकता है। उद्घाटन सत्र की समाप्ति पर तीन तकनीकी सत्र सम्पन्न हुए। कार्यक्रम में अतिथियों, वक्ताओं सहित विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ. प्रवीण पुनिया, सहायक कुलानुशासक स्वामी परमार्थदेव एवं समस्त अधिकारीगण, सभी संकाय एवं विभाग के अध्यक्ष, आचार्यगण, शोधछात्रा आॅनलाईन माध्यम से जुडे़। अन्य संस्थानों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम से जुड़कर अपना ज्ञानवर्धन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं कार्यक्रम के सहसंयोजक डाॅ. रुद्र भण्डारी एवं डाॅ. विपिन कुमार द्विवेदी द्वारा किया गया। अन्त में डाॅ. द्विवेदी द्वारा विश्वविद्यालय परिवार की ओर से अतिथि वक्ताओं एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।