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राजनीतिक दलों की गलतियों के कारण देश में हिंदुओं को अस्तित्व खतरे में पड़ गया है
September 4, 2020 • BABLI JHA • current

हरिद्वार। अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती ने कहा है कि सौ करोड़ हिन्दूओं के लिए एक अलग देश होना चाहिए। विश्व में सभी धर्मो के लोगो के लिए अलग देश है तो हिन्दू धर्म के लिए क्यों नही। उन्होने कहा कि राजनीतिक दलों की गलतियों के कारण देश में हिंदुओं को अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। घटती आबादी के कारण हिंदु समाज की स्थिति अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दुओं के समान हो जाएगी। शुक्रवार को प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए यति नरसिंहानन्द सरस्वती ने कहा कि इस स्थिति से बचने के लिये सनातन वैदिक राष्ट्र का निर्माण करना होगा। उन्होंने संतो से आगामी महाकुम्भ को सनातन वैदिक राष्ट्र को समर्पित करने का आग्रह किया है, ताकि पूरे विश्व के हिन्दू इस कार्य मे जुट जाएं। उन्होंने बताया कि सनातन वैदिक राष्ट्र को लेकर पहली धर्म संसद 2, 3और 4 अक्टूबर को शिवशक्ति धाम डासना जिला गाजियाबाद में आयोजित की जाएगी। सनातन धर्म के सभी धर्मगुरुओ को इस कार्य में सहयोग करना चाहिये। दिव्यांग बालयोगी ज्ञाननाथ महाराज ने कहा कि हिन्दुओ के लिये ये वास्तव में बहुत ही शर्मनाक है कि सौ करोड़ हिन्दुओ के पास अपना कोई देश नहीं है। दुनिया का कोई भी धर्म,संस्कृति और सभ्यता बिना अपने राष्ट्र के ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह सकती। हिन्दुओ ने 1947 में इस देश को सनातन वैदिक राष्ट्र न घोषित करके बहुत बड़ी ऐतिहासिक गलती की थी। जिसका मूल्य हमे आज चुकाना पड़ रहा है। अब समय आ गया है कि हिन्दुओ को अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए। इस कार्य मे सनातन के सभी धर्मगुरुओं को अपनी पूरी शक्ति लगानी चाहिये। पण्डित अधीर कौशिक ने कहा कि हरिद्वार जैसी धार्मिक नगरी में हिन्दुओ की आस्था पर प्रहार किया जा रहा है। मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है और हमारी गंगा को देवधारा घोषित करने का षडयंत्र किया जा रहा है। कहा कि हिन्दुओं का अपना कोई राष्ट्र होता तो ऐसा नहीं होता। इसीलिये अब सनातन वैदिक राष्ट्र के निर्माण के लिये अतिशीघ्र अभियान हरिद्वार से आरम्भ किया जाएगा। वार्ता के दौरान यति रामानन्द सरस्वती, यति सत्यदेवानन्द सरस्वती, हिन्दू स्वाभिमान के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष बाबा परमेन्द्र आर्य व महामंत्री अनिल यादव भी मौजूद रहे।