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संस्कृत के प्रचार-प्रसार को लेकर ऑनलाइन अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया
September 11, 2020 • BABLI JHA • other

हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा संस्कृत के प्रचार-प्रसार को लेकर ऑनलाइन अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. प्रेमचन्द शास्त्री ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान सम्पदा की धरोहर है। संस्कृत के प्रत्येक शब्द हम सबको भारतीयता, मानवता और वैज्ञानिकता का बोध कराते हैं। आज युवा पीढ़ी को संस्कृत और विज्ञान को समझने और पढ़ने के लिए आगे आना चाहिए, संस्कृत में वैज्ञानिक अनुसंधान के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। जिस दिन भारत के लोग संस्कृत और विज्ञान को मिलाकर अनुसन्धान करेंगे उस दिन भारत विश्व विजयी होगा। अकादमी के सचिव डा. आनन्द भारद्वाज ने कहा कि अकादमी द्वारा नये काव्य सृजन की दिशा में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। संस्कृत एक प्रमाणिक और वैज्ञानिक भाषा है। संस्कृत के प्रचार प्रसार एवं अध्ययन व अध्यापन से ही अन्य भाषाएं समृद्ध होंगी। कवि सम्मेलन में प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के पंजाब के प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल, लखनऊ से डा. नवलता, वाराणसी से प्रो. कमला पाण्डेय, वृन्दावन से डा. रामकृपाल त्रिपाठी, हिमाचल प्रदेश से डा. मनीष जुगरान, हरिद्वार से डा. निरंजन मिश्र, आचार्य रामचन्द्र वैजापुरकर, डा. प्रकाशचन्द्र पन्त, पिथौरागढ़ से डा. हेमचन्द्र बेलवाल सहित अन्य संस्कृत कवियों ने काव्यपाठ किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन अकादमी के शोध अधिकारी डा. हरीशचन्द्र गुरुरानी ने किया। कोषाध्यक्ष कन्हैयाराम सार्की आभार प्रकट किया। इस दौरान प्रकाशन अधिकारी किशोरीलाल रतूडी, प्रशासनिक अधिकारी लीला रावत, लेखाकार राधेश्याम, ऑनलाइन उपस्थिति में प्रो. विनीत घिल्डियाल, डा. चन्द्रप्रकाश उप्रेती, डा. श्यामलाल गौड़, विशालप्रसाद भट्ट, डा. कमल बेलवाल, नवीन सेमवाल आदि श्रोतागण शामिल रहे।