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सरकार शीघ्र स्कैप चैनल संबंधी शासनादेश को शीघ्र निरस्त करे,वरना होगा बड़ा आंदोलन
July 12, 2020 • BABLI JHA • current

हरिद्वारः। श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि ब्रह्मकुंड हरकी पैड़ी पर आ रही गंगा की पावन धारा को गैर कानूनी ढंग से स्कैप चैनल घोषित किया है। कहा कि उस विभाग ने स्कैप चैनल के लिए शासनादेश जारी कर दिया, जिसे इसका अधिकार ही नहीं है, जबकि जिसे इसका अधिकार है उस सिचाई विभाग ने तो स्कैप चैनल संबंधी शासनादेश पर आपत्ति जताते हुए संशोधित करने के लिए पत्र लिखा। कहा कि सरकार स्कैप चैनल संबंधी शासनादेश को शीघ्र निरस्त करे वरना सभा धर्मनगरी के संतों और सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करेगी। रविवार को श्री गंगा सभा के कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में 14 दिसंबर 2016 को आवास विभाग की ओर से सर्वानंद घाट से श्मशान खड़खड़ी व हरकी पैड़ी से होते हुए डामकोठी तक व डामकोठी के बाद सतीघाट कनखल होते हुए दक्ष मंदिर तक बहने वाले भाग को स्कैप चैनल का शासनदेश जारी किया, जबकि आवास विभाग को गंगा व नहरों के लिए कोई शासनादेश जारी करने का अधिकार ही नहीं है। इस बारे में सभी अधिकार सिचाई विभाग के पास है और उसने इस बारे में कोई आदेश जारी नहीं किया है। इस संबंध में सिचाई विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव आनंदवर्धन ने भी 16 जनवरी 2017 को आवास विभाग की ओर से जारी स्कैप चैनल के शासनादेश पर आपत्ति जताई थी। इसमें उन्होंने खड़खड़ी घाट, दुर्गाघाट होते हुए हरकी पैड़ी से प्रवाहित डामकोठी तक जाने वाली धारा को स्कैप नहीं माना है। उन्होंने आवास सचिव से कहा था कि यह अधिकार उनके विभाग के क्षेत्राधिकार से बाहर है। प्रमुख सचिव सिचाई ने स्कैप चैनल के शासनादेश को प्राथमिकता के आधार पर संशोधित करने के लिए कहा था लेकिन आज तक आवास विभाग ने अपने शासनादेश को संशोधित नहीं किया। तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि सिचाई विभाग ने हरकी पैड़ी से डामकोठी तक बहने वाली धारा को हिदू मान्यताओं के अनुसार आदिकाल से ही भगीरथी गंगा नदी माना है। इसे स्कैप चैनल कभी नहीं माना है इसलिए वह सरकार से मांग करते हैं कि स्कैप चैनल का शासनादेश जल्द निरस्त किया जाए। कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मिला जाएगा। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा ने कहा कि हरकी पैड़ी से बगैर चैनल मायापुर से कनखल की ओर जाने वाली पतली धारा भी मायापुर से कनखल की ओर से जाने वाली धारा अविछिन्न धारा ही है। इसको गंगाजी का ही प्राचीन स्वरूप कहेंगे। कहा कि कुछ भू-माफिया किस्म के लोग नहीं चाहते हैं कि मां गंगा को गंगा का दर्जा मिले, ताकि उनके निजी स्वार्थ पूरे हो सकें लेकिन उनके यह मंसूबे किसी भी हालत में पूरे नहीं होने दिया जाएगा ।